Pharmacy Website
Clinic Website
TabletWise.com TabletWise.com
 
सुनने की पूरी प्रक्रिया में कैल्शियम आयन एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऊँची आवाज़ सुनने के बाद सुनने की क्षमता में अल्पकालिक गिरावट के पीछे के कारण की खोज

लेखक   •  
शेयर
ऊँची आवाज़ सुनने के बाद सुनने की क्षमता में अल्पकालिक गिरावट के पीछे के कारण की खोज
Read in English

लिंकोपिंग यूनिवर्सिटी, स्वीडन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन से पता चला है कि इंसानों के कान ऊँची आवाज़ के संपर्क में आने पर थोड़ी देर के लिए सुन्न क्यों महसूस करते हैं या उनकी सुनने की क्षमता कम क्यों हो जाती है।

यह अध्ययन 5 मार्च 2019 को प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

यह आमतौर पर देखा जाता है कि ऊँची आवाज़ के संपर्क में आने के बाद इंसान के कान सुन्न हो जाते हैं या अस्थायी रूप से वे अपनी सुनने की क्षमता खो देते हैं। इसलिए, शोधकर्ताओं ने इस घटना के पीछे के कारण को ढूंढ़ने की कोशिश की। यह नया अध्ययन गिनी सूअरों के आंतरिक कान पर किया गया था क्योंकि इनके कान मानव कान के जैसे ही होते हैं।

कान के अंदर की ध्वनि तरंगों को तंत्रिका आवेगों में बदलने का काम आंतरिक कान जिसे कर्णावर्त कहा जाता है, उसके घुमावदार खोल के आकार वाले हिस्से द्वारा किया जाता है। इस कर्णावर्त में एक पर्दे वाली झिल्ली होती है जो कैल्शियम आयन को इकठ्ठा करती है और आंतरिक कान की संवेदी कोशिकाओं के कार्यों को प्रभावित करती है।

सुनने की पूरी प्रक्रिया में कैल्शियम आयन एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्योंकि जब कान के अंदर कैल्शियम खत्म हो जाता है, तो संवेदी कोशिकाओं की ध्वनि विकसित करने की प्रतिक्रियाएं भी कम हो जाती हैं। जब कान के अंदर इस कैल्शियम की कमी को पूरा कर दिया जाता है, तो संवेदी क्रियाएं वापस से सामान्य हो जाती हैं।

कान के अंदर कैल्शियम आयन की कमी बहुत ही ऊँची आवाज़ों को सुनने से या कैल्शियम कीटाणुओं के संपर्क में आने से हो सकती है।

कान के आस-पास के तरल पदार्थ जो संवेदी कोशिका को घेरते हैं, उनमें कैल्शियम की मात्रा कम होती है जबकि पर्दे वाली झिल्ली कैल्शियम आयन से भरपूर होती है। जब वैज्ञानिकों ने कान के अंदर कैल्शियम को खत्म करने वाले कुछ पदार्थ डाले, तो संवेदी कोशिकाओं ने काम करना बंद कर दिया।

इस अध्ययन के आगे के चरणों में, वैज्ञानिकों ने संवेदी कोशिकाओं का ऊँची ध्वनि और शोर से परिचय करवाया। लेकिन उन्हें तब भी पहले जैसे ही परिणाम मिले, यानी कोशिकाओं ने फिर से अस्थायी रूप से काम करना बंद कर दिया। इससे उन्हें महसूस हुआ कि ऊँची आवाज़ या शोर के संपर्क में आने से और कान के अंदर कैल्शियम आयन की कमी के कारण कान सुन्न हो जाते हैं या वे अस्थायी रूप से अपनी सुनने की क्षमता खो देते हैं।

अध्ययन के प्रमुख लेखक एंडर्स फ्रिडबर्गर ने कहा, " इस अध्ययन से हमें पता चला है कि पर्दे वाली झिल्ली के रूप में जाने जाने वाले कर्णावर्त में एक छोटी संरचना इस प्रक्रिया में कैल्शियम आयन के लिए एक भंडार घर का कार्य कर के एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ये कैल्शियम आयन संवेदी कोशिकाओं के कार्य को नियंत्रित करते हैं। "

फ्रिडबर्गर ने कहा, "जब हम प्रयोगशाला में आंतरिक कानों को शोर के सम्पर्क में लाते हैं, तो पर्दे वाली झिल्ली में कैल्शियम का स्तर गिर जाता है, और संवेदी कोशिकाएं काम करना बंद कर देती हैं। हालांकि, थोड़ी देर के बाद, कैल्शियम आयन फिर से अपने पिछले स्तर पर लौट आती हैं, और संवेदी कोशिकाएं फिर से काम करना शुरू कर देती हैं।”

इस अध्ययन के पीछे के शोधकर्ताओं में से एक, पियरे हकीज़िमाना ने कहा, "हम जानते थे कि सुनने के लिए यह झिल्ली आवश्यक है, और यह सही ढंग से अपनी जगह पर स्थित होनी चाहिए, लेकिन हमे यह नहीं पता था कि इस झिल्ली को नुकसान होने से इंसान की सुनने की क्षमता क्यों कम हो जाती है।"

आगे के अध्ययनों में उम्र से संबंधित सुनने की कमज़ोरी में इसी घटना की संबंधता का पता लगाया जायेगा।

ताज़ा खबर

TabletWise.com