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फेफड़ों में मौजूद मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया, वह जीवाणु जो टीबी पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है।

टीबी करने वाले जीवाणु में आत्मघाती विषैले पदार्थ की खोज

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टीबी करने वाले जीवाणु में आत्मघाती विषैले पदार्थ की खोज
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वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया कि जो जीवाणु टीबी के लिए जिम्मेदार होते हैं, वे उनसे उत्पन्न होने वाले एक आत्मघाती विषैले पदार्थ द्वारा मारे जा सकते हैं। यह अध्ययन युरोपियन मॉलिक्यूलर बायोलॉजी लेबोरेटरी और इंस्टीट्यूट ऑफ फार्माकोलॉजी एंड स्ट्रक्चरल बायोलॉजी द्वारा किया गया था।

यह अध्ययन 18 फरवरी 2019 को मॉलिक्यूलर सेल में प्रकाशित हुआ था।

टीबी एक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस जीवाणु के कारण होती है। यह बीमारी हवा के माध्यम से फैल सकती है और शरीर के सभी अंगों, खासकर फेफड़ों को प्रभावित कर सकती है। अगर इसका इलाज नहीं किया जाए, तो टीबी मानव शरीर के लिए घातक हो सकता है।

जीवाणु द्वारा उत्पन्न आत्मघाती विषैले पदार्थ को विष नाशक प्रोटीन के साथ निष्प्रभावी किया जा सकता है। जीवाणु ऐसे अणु उत्पन्न करते हैं जो स्वयं विषैले होते हैं। जब इन विषैले पदार्थों को एक गंभीर वातावरण के संपर्क में लाया जाता है, तो वे एक जीवाणु आबादी के विकास को धीमा कर देते हैं।

कुछ मामलों में, विषैले पदार्थ उन जीवाणु को भी मार सकते हैं जो मूल रूप से इनका उत्पादन करते हैं। इस "आत्महत्या" का कारण अभी भी अज्ञात है। दो संभावनाएं हैं जो इसका उत्तर ढूंढ़ने में मदद कर सकती हैं।

जब यह विषैले पदार्थ पोषक तत्वों की कमी का सामना करते हैं, तो इनमें से कुछ सबके लाभ के लिए खुद का बलिदान करते हैं। या विषैले पदार्थ एक प्रतिविषाणुज रक्षा तंत्र के रूप में कार्य कर सकते हैं जो संक्रमित जीवाणु को मारता है।

आत्मघाती विषैले पदार्थों में से एक की पहचान एमबीसीटी (MbcT) के रूप में की गई है। यह एमबीसीटी विषैला पदार्थ मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस में मौजूद होता है। यदि एक विष नाशक का उपयोग नहीं किया जाता है, तो एमबीसीटी विषैला पदार्थ मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस को मार देता है। ऐसा इनमें मौजूद NAD के भंडार को तोड़ने के कारण होता है। NAD वह अणु होता है जो जीवन को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है।

अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक ओलिवर नियरोलेस ने इस विषैले पदार्थ की चिकित्सीय क्षमता को निहित किया। शोधकर्ताओं ने चूहे और मानव कोशिकाओं को उठाया और उन्हें माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस से संक्रमित किया जिसमें एमबीसीटी विषैले पदार्थ की कमी थी।

शोधकर्ताओं ने तब कृत्रिम रूप से उनमें एमबीसीटी विषैले पदार्थ बनाने को प्रेरित किया। एक बार जब विषैले पदार्थ सक्रिय हो गए, तो इससे जीवाणु की संक्रमित कोशिकाओं की संख्या कम हो गई। जिसके परिणामस्वरूप चूहे की उत्तरजीविता दर में वृद्धि हुई।

युरोपियन मॉलिक्यूलर बायोलॉजी लेबोरेटरी (EMBL) के शोधकर्ताओं ने एमबीसीटी कॉम्प्लेक्स की 3D संरचना का निर्धारण किया है। शोधकर्ता अब ऐसे संयोजनों का पता लगाने और उनकी पहचान करने के लिए काम कर रहे हैं जो विषैले पदार्थ को विषहर औषध से मुक्त करने में मदद कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि ये अणु अन्य संक्रामक रोगों से लड़ने में मदद कर सकते हैं क्योंकि इसी तरह के विषैले पदार्थ और विष नाशक को अन्य हानिकारक जीवाणुओं में पाया जाता है।

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