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रिजर्व बैंक की छोटे व्यवसायों के लिए पुनर्गठन योजना।

रिजर्व बैंक की छोटे व्यवसायों के लिए पुनर्गठन योजना

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रिजर्व बैंक की छोटे व्यवसायों के लिए पुनर्गठन योजना
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार के उद्यमों (MSME) के तनावग्रस्त खातों के लिए एक पुनर्गठन योजना जारी की है। योजना पुनर्गठित ऋणों को "गैर-निष्पादित" करार किये जाने से बचाये गी। यह योजना केवल 25 करोड़ रुपये या उससे कम के बकाया मूल्य वाले खातों पर लागू होगी।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए, ऋण को "स्टैण्डर्ड" के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए, भले ही ऋण तनावग्रस्त है या नहीं। लेकिन अगर ऋण को नीचा वर्गीकृत किया गया है, तो यह योजना के लिए लागू नहीं होगा।

वन टाइम स्कीम के तहत पात्र खातों के पुनर्गठन के लिए बैंकों और नॉनबैंकिंग संस्थाओं को 2019-2010 वित्तीय वर्ष के अंत तक का समय दिया गया है। मौजूदा प्रावधानों के अलावा, प्रत्येक पुनर्गठित ऋण पर 5% प्रावधान शुल्क भी लगाया जायेगा। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कर्जदारों को जीएसटी का अनुपालन करना होगा।

यह योजना देश में छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए है। यह केंद्र सरकार को छोटे व्यवसायों की प्रमुख मांग रही है।

भारत के छोटे व्यवसायों को ऋणों से कुछ राहत प्रदान करने के अलावा, इस कार्यक्रम से उन्हें अन्य वित्त सुविधा भी मिल सकेगी।

छोटे व्यवसाय भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। छोटे व्यवसाय एक महत्वपूर्ण वोट बैंक भी हैं।

जीएसटी पंजीकरण के संबंध में, केंद्र सरकार छोटे व्यवसायों के लिए न्यूनतम बिक्री आवश्यकता बढ़ाने की योजना भी बना रही है।

जीएसटी पंजीकरण की वर्तमान में बिक्री सीमा 20 लाख है। केंद्र सरकार छोटे व्यवसायों के लिए बिक्री सीमा 75 लाख तक बढ़ाने की योजना बना रही है। यह छोटे व्यवसायों को जीएसटी कराधान नीति की व्यापक जरूरतों का पालन करने से राहत देगा।

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