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मोटापे से ग्रस्त लोगों मैं सुगंध की भेदभाव करने की क्षमता कम होती है

मोटापे और सुगंध की भावना के बीच एक कड़ी हो सकती है

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मोटापे और सुगंध की भावना के बीच एक कड़ी हो सकती है
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एक हालिया अध्ययन ने निष्कर्ष निकाला है कि जो लोग मोटापे से ग्रस्त हैं उनमें सुगंध की भेदभाव करने की क्षमता कम होती है। उन लोगों की तुलना में जिन लोगों मैं सुगंद करने की शक्ति ज़ायदा होती है वो मोटापे से ग्रस्त नहीं होते हैं।

मोटापा एक चिकित्सा स्थिति है जिसमें शरीर में वसा (चिकनाई) की मात्रा बढ़ जाती है।

मोटापा हृदय रोग और मधुमेह के खतरे को बढ़ाता है। मोटापा एक वैश्विक मुद्दा है और यह दुनिया भर के लोगों को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पाया है कि विश्व में 1975 से अब तक मोटापा लगभग तीन गुना हो गया है। 2016 में, 200 करोड़ ज़यादा वजन वाले वयस्कों में से, 65 करोड़ मोटे हैं। 5 वर्ष से कम आयु के 4.1 करोड़ बच्चे मोटे या अधिक वजन वाले हैं।

डॉक्टरों द्वारा मोटापा बॉडी मास इंडेक्स या बीएमआई से परिभाषित किया गया है। बीएमआई एक नैदानिक उपकरण के रूप में माना जाता है जो विश्लेषण करता है कि कोई व्यक्ति अपनी ऊंचाई के लिए सही वजन पर है या नहीं। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) ने वर्ष 2013 में मोटापे को बीमारी के रूप में घोषित किया। यह इस विचार पर लक्षित है कि मोटापा केवल ज्यादा खाने और शारीरिक व्यायाम की कमी के कारण होते है। इसके बजाय, एएमए का कहना है कि कई मामलों में लोगों का वजन पर कोई नियंत्रण नहीं है क्योंकि यह कई कारकों के कारण हो सकता है।

सुगंध की भावना और मोटापा जुड़ा हुआ है

अब तक, सुगंध की भावना और मोटापे के बीच संबंध स्पष्ट रूप से पहचाने नहीं गए थे। यह लिंक हाल ही में ओटागो, न्यूज़ीलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा खोजा गया था और मोटापा समीक्षा पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। अध्ययन से पता चलता है कि किसी व्यक्ति के शरीर के वजन और उनकी सुगंध की क्षमता के बीच एक मजबूत संबंध है। किसी व्यक्ति की सुगंध जितनी बेहतर होगी, व्यक्ति के पतले होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। इसका उलटा भी सच है। जिन लोगों को सुगंध की खराब समझ होती है वे शायद मोटे होते हैं। खराब सुगंध मोटापे के जोखिम को बढ़ा सकती है और लोगों को अस्वास्थ्यकर भोजन का चयन करवा सकती है।

वजन घटाने की सर्जरी सुगंध की भावना में सुधार कर सकती है

इस शोध में पाया गया कि मोटापा व्यक्ति के चयापचय को बदल देता है जो बदले में पेट और मस्तिष्क के बीच संचार मार्गों को प्रभावित करता है। अध्ययन ने दो वजन घटाने वाले सर्जिकल उपचारों की जांच की; पेट हटाने और सर्जिकल बाईपास। पेट और मस्तिष्क के बीच संचार पथ को फिर से स्थापित करने के लिए, दो प्रक्रियाओं के बीच, पेट का निष्कासन अधिक प्रभावी साबित हुआ है। पेट हटाने से सूंघने की क्षमता में सुधार होता है, जबकि अन्य मोटापे की सर्जरी का भी उतना असर नहीं होता है।

ये निष्कर्ष खाने की आदतों और सुगंध की भावना के बीच एक संबंध स्थापित करते हैं। इस अध्ययन से विभिन्न बॉडी शेप समूहों में सुगंध की भूमिका का हमारी समझ में सुधार होता है।

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