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रिपोर्टों के अनुसार, सालाना 390 मिलियन लोग डेंगू से पीड़ित होते हैं।

दो प्रतिरक्षा कोशिकाएं डेंगू विषाणु का इलाज कर सकती हैं

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दो प्रतिरक्षा कोशिकाएं डेंगू विषाणु का इलाज कर सकती हैं
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पहली बार ड्यूक-एनयूएस मेडिकल स्कूल के वैज्ञानिकों ने दो प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बीच परस्पर क्रिया का प्रदर्शन किया है जो प्रारंभिक चरण में डेंगू विषाणु से लड़ने में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।

यह रिपोर्ट द जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित हुई थी।

डेंगू विषाणु सबसे व्यापक संक्रमणों में से एक है जो मच्छरों द्वारा फैलता है और खासकर उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, 390 मिलियन (39 करोड़) लोग सालाना इस बीमारी से पीड़ित होते हैं।

यह संक्रमण स्वास्थ्य के लिए कुछ गंभीर नुकसान कर सकता है जिसके कारण उच्च बुखार हो सकता है और कभी-कभी यह जान लेवा बीमारी का रूप ले सकता है। बाजार में डेंगू के लिए कोई विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन जिन लोगों को जीवनकाल में कम से कम एक बार डेंगू हुआ हो, उनके लिए टीकाकरण की एक खुराक मौजूद है।

इस परस्पर क्रिया को निर्धारित करने के लिए मस्तूल कोशिकाओं की उपस्थिति के साथ और बिना उपस्थिति वाले एक पशु के नमूने पर तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। शोध के अनुसार मस्तूल कोशिकाओं ने संक्रमित क्षेत्र में कई अन्य प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को आकर्षित किया। इन कोशिकाओं में से एक को गामा डेल्टा (γδ) T कोशिका कहा जाता है।

(γδ) T कोशिकाएं मस्तूल कोशिकाओं के संपर्क में भी आईं, जैसा विषाणु संबंधी संक्रमणों में नहीं देखा गया है। (γδ) T कोशिकाएं एक रिसेप्टर से जुड़ी होती हैं जिसे "एंडोथेलियल प्रोटीन सी रिसेप्टर" के रूप में जाना जाता है जो मस्तूल कोशिकाओं पर मौजूद होता है।

इस प्रक्रिया के कारण, T कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं, उनकी संख्या में वृद्धि होती है और इंटरफेरॉन गामा का उत्पादन करती हैं। यह डेंगू से संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करने में उनकी भूमिका शुरू करता है।

डॉ. एशले सेंट जॉन, अध्ययन के संबंधित लेखिका ने कहा, "जब हमने पहली बार अवलोकन किया तो संचार की प्रक्रिया में कोशिकाओं की ये [प्रतिरक्षा साईनेप्स] संरचनाएं बहुत ही रोमांचक और देखने में अनोखी थीं और इसने संक्रमण से लड़ने के लिए कोशिकाओं द्वारा एक साथ काम किए जाने वाले तरीकों को दर्शाया।

उन्होंने आगे कहा, "हमें मच्छरों द्वारा त्वचा में डाले जाने वाले डेंगू और अन्य विषाणु संबंधित रोगजनकों के लिए बेहतर टीकाकरण की आवश्यकता है।"

ड्यूक-एनयूएस मेडिकल स्कूल के सीनियर वाइस डीन ऑफ रिसर्च, प्रोफेसर पैट्रिक केसी ने टिप्पणी की, “हालिया समाचारों के अनुसार, 2019 की शुरुआत के बाद से सिंगापुर में डेंगू के मामलों की संख्या दो वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर रही है। यह समयबद्ध अध्ययन एक उदाहरण के रूप में भी महत्वपूर्ण है कि कैसे हम उत्कृष्ट बुनियादी अनुसंधान से अंतर्दृष्टि विकसित करते हैं जो एक दिन ऐसे रोगों से बचाने के लिए नैदानिक नवाचारों को जन्म दे सकता है। ”

शोधकर्ताओं को अब तक इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली त्वचा में डेंगू जैसे विषाणुओं की पहचान कैसे करती है। गहन विश्लेषण के बाद ही वैज्ञानिक ऐसे विषाणुओं से लड़ने के लिए बेहतर टीकाकरण विकसित करने में सक्षम हो सकते हैं जो मच्छरों द्वारा व्यापक रूप से फैलते हैं।

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