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विटामिन डी एक प्रकार का पोषक तत्व है जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है।

विटामिन डी अस्थि मज्जा के रोग को बढ़ा सकता है

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विटामिन डी अस्थि मज्जा के रोग को बढ़ा सकता है
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कोबे विश्वविद्यालय, जापान के वैज्ञानिकों का सुझाव है कि शरीर में मौजूद विटामिन डी अस्थि मज्जा के रोग को उत्तेजित कर सकता है। यह अध्ययन 4 फरवरी 2019 को ब्लड जर्नल में प्रकाशित हुआ था।

मानव शरीर में तीन प्रकार की रक्त कोशिकाएं होती हैं जो कि लाल रक्त कोशिकाएं, श्वेत रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स हैं। ये कोशिकाएँ अस्थि मज्जा में स्थित हेमटोपोइएटिक स्टेम कोशिकाओं से बनी होती हैं।

अध्ययन के अनुसार, विटामिन डी एक अस्थि मज्जा के रोग में योगदान दे सकता है जिसे माइलोफाइब्रोसिस के रूप में जाना जाता है। माइलोफाइब्रोसिस तंतुप्रसू (फाइब्रोब्लास्ट) कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होती है। ये कोशिकाएँ मज्जा तंत्रिका का उत्पादन करती हैं। अस्थि मज्जा इन तंतुओं के साथ जमा हो जाता है जो रक्त कोशिकाओं को सामान्य रूप से उत्पादन करने से रोकता है।

विटामिन डी एक प्रकार का पोषक तत्व होता है जो शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन को हड्डी और रक्त के बीच के संबंध पर केंद्रित किया। इस अध्ययन के दौरान, वैज्ञानिकों ने बिना विटामिन डी रिसेप्टर्स के चूहों के मॉडल पर अस्थि मज्जा प्रतिरोपण किया। इसका मतलब है कि चूहे के शरीर में विटामिन डी की उच्च सांद्रता थी।

वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि हेमटोपोइएटिक स्टेम कोशिकाएँ विटामिन डी संकेतन द्वारा उत्तेजित की गई थी और मैक्रोफेज नामक प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं में बदल गई। ये मैक्रोफेज युवा ऑस्टियोब्लास्ट कोशिकाओं को उत्तेजित करते हैं जो हड्डियों को सख्त बनाने और माइलोफाइब्रोसिस करने के लिए प्रेरित करते हैं। चूहों को कम विटामिन डी आहार और नियंत्रित मैक्रोफेज दिया गया। वैज्ञानिक मैक्रोफेज को उत्पन्न होने से रोकने में सक्षम थे।

वैज्ञानिकों ने माइलोफाइब्रोसिस रोगियों के समान आनुवंशिक विकार वाले चूहों के नमूने की जांच की। चूहों के भी वही लक्षण थे जो माइलोफाइब्रोसिस रोगियों के होते हैं।

चूहों ने हड्डी के सख्त होने और फाइब्रोसिस के लक्षण दिखाए। चूहों ने कम विटामिन डी आहार लेकर, विटामिन डी रिसेप्टर्स को हटाकर मैक्रोफेज को रोककर उपचार प्राप्त किया। फाइब्रोसिस के हिस्से मुश्किल से दिखाई दे रहे थे। इस उपचार के परिणामस्वरूप अस्थि मज्जा फाइब्रोसिस को परिवर्तित किया गया।

कतयमा, महाध्यापक और अध्ययन के लेखकों में से एक कहते हैं, "इस बीमारी का एकमात्र स्थायी इलाज हेमटोपोइएटिक स्टेम कोशिकाएँ प्रत्यारोपण है, लेकिन यह तरीका कई बुजुर्ग रोगियों के लिए अनुपयुक्त है। ये नए निष्कर्ष बुजुर्गों के लिए विटामिन डी मार्ग और मैक्रोफेज को लक्षित करने के लिए एक उपचार पद्धति विकसित करने में मदद कर सकते हैं।”

अध्ययन के लेखकों ने बताया कि माइलोफाइब्रोसिस का विकास विटामिन डी रिसेप्टर संकेतन द्वारा निर्मित रोगात्मक मैक्रोफेज पर निर्भर है।

इस नए अध्यन से आशा की एक किरण दिखाई दे रही है क्योंकि इसके कारण उपचार के लिए दरवाजे खुल गए हैं। ये परिणाम लोगों के लिए और विशेष रूप से वृद्ध लोगों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

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