Pharmacy Website
Clinic Website
TabletWise.com TabletWise.com
 
वर्ष 1999 से लेकर 2014 तक, यू.एस. में वेस्ट नील वायरस बीमारी के कुल 41,762 मामले सामने आए।

वेस्‍ट नील वायरस की घटना भारत में फिर से देखने को मिली, सरकारी कर रही उपाय

लेखक सोनम  •  
शेयर
वेस्‍ट नील वायरस की घटना भारत में फिर से देखने को मिली, सरकारी कर रही उपाय
Read in English

भारतीय राज्य केरल में वेस्‍ट नील वायरस के रूप में जाना जाने वाला एक रोग पाया गया है। भारत सरकार इस बीमारी के आगे के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए उपाय कर रही है।

वेस्‍ट नील वायरस (डब्‍ल्‍यूएनवी) एक मच्छर जनित बीमारी है। पक्षी इस विषाणु के एक प्राकृतिक मेजबान होते हैं। जब एक मच्छर संक्रमित पक्षी को काटता है, तो मच्छर में विषाणु फैल जाता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में इस विषाणु की उपस्थिति सबसे अधिक पाई जाती है। वर्ष 1999 से लेकर 2014 तक, यू.एस. में वेस्ट नील वायरस बीमारी के कुल 41,762 मामले सामने आए थे।

इस विषाणु के सामान्य लक्षण बुखार, सिरदर्द, लाल चकत्ते या उल्टी हैं। 10 संक्रमित लोगों में से 8 में कोई लक्षण विकसित नहीं होते हैं। अभी तक इस विषाणु के लिए कोई इलाज या टीकाकरण उपलब्ध नहीं है। जलवायु परिवर्तन से वेस्ट नील वायरस के संपर्क में आने का खतरा बढ़ सकता है।

हालाँकि, भारत में इस विषाणु के बहुत कम मामले सामने आते हैं। पहले भी केरल में वेस्ट नील वायरस के कुछ मामले सामने आए थे। वर्ष 2011 के दौरान, केरल राज्य में नियमित रूप से डब्ल्यूएनवी की उपस्थिति दर्ज की गई थी।

हाल ही में केरल के मालापुरम के एक सात वर्ष का बच्‍चा डब्‍ल्‍यूएनवी से पीडि़त हुआ था। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री केरल में स्थिति का बारीकी से निरीक्षण और निगरानी कर रहे हैं।

अधिकारियों ने क्षेत्र में एक हाई अलर्ट जारी किया है। केंद्र और राज्य स्तर पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सभी अस्पतालों को सुरक्षा किट और एकांत वार्ड की व्यवस्था करने के लिए सतर्क किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने रोग के प्रबंधन के लिए राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों की सहायता और मदद के लिए नेशनल सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल (एनसीडीसी) से एक बहु-अनुशासनात्मक केंद्रीय टीम भेजी।

अभी तक, देश के अन्य हिस्सों में इस विषाणु के फैलने के कोई नए मामले सामने नहीं आए हैं।

ताज़ा खबर

TabletWise.com