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शरीर में बदलाव और तकलीफ

स्वास्थ्य    गर्भावस्था    शरीर में बदलाव और तकलीफ

हर कोई गर्भावस्था के दौरान पेट के बढ़ने की उम्मीद रखता है। लेकिन कई महिलाओं में इसके अलावा कई अन्य बदलाव भी होते हैं। जैसे खिंचाव के निशान, वजन बढ़ना, सीने में जलन आदि। इन सभी बदलावों में बेहतर महसूस करने के तरीके जानने के लिए आगे पढ़ें।

शरीर मे दर्द

जैसे-जैसे आपकी बच्चेदानी बढ़ती है, आपको पीठ, पेट, और जांघ के बीच के भाग और जांघों में पीड़ा महसूस होने लगती हैं। कई महिलाओं को बच्चे के सिर के दबाव, बढ़ते वजन, और जोड़ों में ढीलेपन के कारण कमर और कूल्हे की हड्डी के आस-पास भी दर्द महसूस होता है। कुछ गर्भवती महिलाओं को कमर के निचले हिस्से से लेकर किसी एक टांग के पिछले भाग से होते हुए घुटने या पैर तक होने वाले दर्द की समस्या भी होती है। इसे गृध्रसी या साइटिका (Sciatica) कहा जाता है। यह माना जाता है कि यह तब होता है जब बच्चेदानी ‘साइटिक तंत्रिका’ (sciatic nerve) पर दबाव डालती है।

दर्द से राहत के उपाय:

  • लेटना।
  • आराम करना।
  • गरम सेंक देना।

अगर दर्द से आराम नहीं मिल रहा है तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

स्तन में बदलाव

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के स्तन का आकार बढ़ने लगता है। जैसे जैसे प्रसव के लिए दी गई तारीख़ नज़दीक आने लगती है, हॉर्मोन में होने वाले बदलावों के कारण आपके स्तनों का आकार और बड़ा होने लगता है ताकि वह अपने आप को स्तनपान के लिए तैयार कर सकें। आपके स्तन भरे हुए, भारी और नरम हो सकते हैं।

तीसरे तिमाही में, कुछ गर्भवती महिलाओं के स्तनों से कोलोस्ट्रम (Colostrum) निकलना शुरू हो जाता है। कोलोस्ट्रम आपके बच्चे के लिए स्तन से निकलने वाला पहला दूध होता है। यह गाढ़ा और पीले रंग का होता है जिसमें नवजात बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए प्रतिरक्षी (antibodies) मौजूद होते हैं।

इन बदलावों से होने वाली असुविधा का उपाय:

  • मैटरनिटी ब्रा (maternity bra) पहनें।
  • दूध के टपकने से होने वाले गीलेपन को सोकने के लिए ब्रा में पैड लगाएं।

अगर आप स्तन में एक गांठ महसूस करें या निप्पल (स्तन का अगला भाग) में बदलाव हों या निप्पल से दूध के अलावा कोई अन्य पदार्थ निकले या त्वचा में बदलाव होते हैं तो अपने डॉक्टर को बताएं।

कब्ज

कई गर्भवती महिलाओं को कब्ज की समस्या होती है। कब्ज के लक्षणों में सूखा व कठोर मल; हफ्ते में 3 से कम बार मल त्याग होना; या मल त्याग करते समय दर्द होना शामिल होता है।

गर्भावस्था के कारण हार्मोन के उच्च स्तर से पाचन क्रिया धीमी हो जाती है और आंतों की मासपेशियां ढीली हो जाती हैं जिससे कई महिलाओं को कब्ज हो जाती हैं। इसके अलावा, आंतों पर बढ़ती हुई बच्चेदानी का दबाव पड़ना भी इसका एक कारण है।

कब्ज के लिए उपाय:

  • रोजाना आठ से 10 गिलास पानी पीएं।
  • कैफ़ीन का सेवन न करें।
  • फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे ताज़े फल या सूखे मेवे, कच्ची सब्जियां, और साबुत अनाज से बने पकवान और ब्रेड खाएं।
  • हल्का व्यायाम करें।

अगर कब्ज ठीक नहीं होती तो अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें।

सिर चकराना

कई गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के दौरान चक्कर आने और सिर घूमने की शिकायत करती हैं। बेहोश होना असामान्य है लेकिन स्वस्थ गर्भावस्था वाली महिलाएं भी बेहोश हो सकती हैं। इन लक्षणों के कई कारण होते हैं। गर्भावस्था की शुरुआत में रक्त वाहिकाओं की अधिक वृद्धि, बढ़ती हुई बच्चेदानी का रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ना, और शरीर के लिए भोजन करने की बढ़ती ज़रूरतें, इन सभी के कारण गर्भवती महिला को चक्कर आने और सिर घूमने की समस्या होती है।

चक्कर आने से बचने या इन्हें कम करने के लिए उपाय:

  • धीरे-धीरे से खड़े होना।
  • बहुत लंबे समय तक खड़े न रहना।
  • भोजन अवश्य करें।
  • अपनी बाईं तरफ लेटें।
  • ढीले कपड़े पहनें।

यदि आप बेहोशी जैसा महसूस करें और योनि से रक्त बहे या पेट में दर्द हो तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

थकान और नींद की समस्याएं

गर्भावस्था के दौरान, अच्छे से सोने के बाद भी आप थका हुआ महसूस कर सकते हैं। कई महिलाओं को लगता है कि वह पहले तिमाही में ही अत्याधिक थकने लगी हैं। चिंता न करें, यह सामान्य है! यह आपके शरीर का यह बताने का तरीका है कि आपको ज़्यादा आराम करने की ज़रूरत है। दूसरे तिमाही में, थकान की जगह आप स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करेंगी। लेकिन तीसरे तिमाही में, फिर से थकावट होने लगती है। जैसे जैसे आपका वजन और पेट बढ़ने लगता है वैसे वैसे आपको सोने में ज़्यादा मुश्किल होने लगती है। बच्चे की हरकतें, पेशाब का बार बार आना, और शरीर के चयापचय (metabolism) में वृद्धि आपकी नींद में परेशानी पैदा कर सकते हैं। पैर में होने वाली ऐंठन के कारण भी रात को गर्भवती महिलाएं अच्छे से सो नहीं पातीं।

इन समस्याओं से बचने के उपाय:

  • अपनी बाईं तरफ लेटें।
  • सहारे के लिए तकियों का उपयोग करें जैसे अपनी पीठ के पीछे, घुटनों के बीच, और पेट के नीचे तकिया रखें
  • सोने की अच्छी आदतों का पालन करें, जैसे कि रोज़ एक ही समय पर सोना और जागना और अपने बिस्तर को केवल नींद लेने और यौन संबंध बनाने के लिए ही उपयोग करें।
  • थोड़ा जल्दी सोएं।
  • अगर आप रात में भरपूर नींद नहीं ले पा रहे हैं तो दिन के समय थोड़ी देर के लिए सो जाएं।
  • दिन के शुरआती हिस्से में ही अपने लिए आवश्यक तरल पदार्थों की पर्याप्त मात्रा पी लें, ताकि सोने के कुछ घंटों पहले आप कम पी सकें।

सीने में जलन और बदहजमी

हार्मोन और बढ़ती हुई बच्चेदानी के दबाव के कारण सीने में जलन और बदहजमी होती है। गर्भावस्था के हार्मोन पाचन तंत्र की मांसपेशियों को धीमा कर देते हैं। इसलिए खाना धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और पाचन करने की गति कम हो जाती है। इसी वजह से कई गर्भवती महिलाएं अपने पेट को गैस बनने के कारण फुला हुआ महसूस करती हैं।

यह हार्मोन पेट से अन्नप्रणाली (esophagus) को अलग करने वाले वाल्व (valve) को भी आराम देते हैं। इसके कारण भोजन और एसिड पेट से अन्नप्रणाली(esophagus) में वापिस आ जाते हैं। यह भोजन और एसिड सीने में जलन पैदा करते हैं। जैसे जैसे आपका बच्चा बड़ा होता है वैसे वैसे बच्चेदानी आपके पेट को धकेलती है जिसके कारण गर्भावस्था के आखिरी दिनों में सीने की जलन और अधिक होने लगती है।

इससे राहत कैसे पाएं:

  • तीन बार बड़ी मात्रा में भोजन करने के बजाय कई छोटी छोटी मात्रा वाले भोजन खाएं और धीरे-धीरे खाएं।
  • भोजन करते समय पानी न पीएं।
  • तले हुए पकवान न खाएँ।
  • खट्टे फल या जूस और मसालेदार भोजन से दूर रहें।
  • सोने के कुछ घंटों पहले न कुछ खाएँ और न पीएं।
  • भोजन करने के तुरंत बाद न लेटें।

यदि इन सुझावों को आज़माने के बाद भी लक्षणों में कोई सुधार नहीं होता तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। अपने डॉक्टर से ऐसिडिटी को कम करने वाली दवाएं (antacids) का उपयोग करने के बारे में पूछें।

बवासीर

मलाशय में सूजी और उभरी हुई नसों को बवासीर कहते हैं। इनके कारण गुदा में खुजली, दर्द और रक्तस्राव होता है। गर्भावस्था के दौरान बवासीर होना कई कारणों से सामान्य हैं। गर्भावस्था के दौरान रक्त की मात्रा में काफी वृद्धि होती है, जिसके कारण नसें फूल जाती हैं। बढ़ती हुई बच्चेदानी भी मलाशय की नसों पर दबाव डालती है। इसके अलावा, कब्ज के कारण बवासीर की समस्या और बिगड़ सकती है। आमतौर पर बवासीर में बच्चे होने के बाद सुधार आ जाता है।

इससे राहत कैसे पाएं:

  • बहुत सारा पानी पीएं।
  • फाइबर युक्त भोजन लें, जैसे साबुत अनाज से बने पकवान, कच्ची या पकी हुई सब्जियां और फल।
  • मल त्याग करते समय ज़ोर का उपयोग न करें।
  • बवासीर की पीड़ा कम करने के लिए विच हैज़ल (witch hazel) जैसे उत्पादों का उपयोग करने के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

खुजली

कई गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान खुजली होती है। आमतौर पर यह खुजली पेट पर होती है। लेकिन हथेलियों और पैरों के तलवों पर खुजली होना भी आम समस्या है। गर्भावस्था के हार्मोन और खींची हुई त्वचा आपको होने वाली ज़्यादातर तकलीफों का कारण होते हैं। आमतौर पर बच्चे के होने के बाद खुजली कम होने लगती है।

खुजली कम करने के उपाय:

  • सौम्य साबुन और नरमी देने वाली क्रीमों का प्रयोग करें।
  • गर्म पानी से न नहाएं।
  • खुजली दिलाने वाले कपड़े न पहने।

स्वयं की देखभाल के एक हफ्ते के बाद भी यदि लक्षणों में सुधार नहीं होता तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

टांगों में ऐंठन

गर्भावस्था के दौरान कभी कभी आपके पैरों या टांगों की मांसपेशियों में अचानक से ऐंठन हो सकती है। यह आमतौर पर रात में होती है। यह आपके शरीर के कैल्शियम बनाने की प्रक्रिया के तरीके में बदलाव के कारण होती है।

इससे राहत के लिए उपाय:

  • मांसपेशियों को कोमलता से खींचे।
  • हल्का व्यायाम करें।
  • अचानक से हुई ऐंठन के लिए, अपने पैर को आगे की ओर मोड़ें।
  • कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ खाएं।
  • अपने डॉक्टर से कैल्शियम के आहार पूरक (supplements) के बारे में पूछें।

उलटी और मतली आना (Morning sickness)

पहले तिमाही में हार्मोन में बदलाव होने के कारण मतली और उल्टी हो सकती है। यह दिन के किसी भी समय हो सकती है और आमतौर पर दूसरे तिमाही के बाद कम होने लगती है।

इससे राहत पाने के लिए यह उपाय करें:

  • अपने पेट को खाली होने से बचाने के लिए तीन बार बड़ी मात्रा में भोजन करने के बजाय कई बार छोटी-छोटी मात्रा में भोजन करें।
  • भोजन करने के तुरंत बाद न लेटें।
  • सुबह उठने के तुरंत बाद ब्रेड, नमकीन बिस्कुट आदि खाएं।
  • कम चर्बी और आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ जैसे कि अनाज, चावल और केले खाएं।
  • पानी, चाय, या शीतल पेय पीएं या बर्फ के छोटे टुकड़े खाएं।
  • आपके पेट में समस्या करने वाली गंध से बचें।

यदि आपको फ्लू जैसे लक्षण दिखें, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकते हैं।

यदि आपको हर दिन गंभीर, निरंतर मतली और/या उल्टी हो तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

नाक की समस्याएं

गर्भावस्था के दौरान नाक से खून आना और नाक का भरे रहना सामान्य है। यह आपके शरीर में रक्त की बढ़ी हुई मात्रा और आपके नाक के ऊतकों के लिए कार्यकारी हार्मोन के कारण होता है।

इससे राहत कैसे पाएं:

  • धीरे-धीरे अपनी नाक से हवा बाहर निकालें।
  • तरल पदार्थ पीएं और हवा में नमी पैदा करने वाले उपकरणों का उपयोग करें।
  • नाक से बहते खून को रोकने के लिए कुछ मिनट के लिए अपने अंगूठे और तर्जनी अंगुली (first finger) से अपनी नाक को दबाएं।

अगर आपके नाक से बार बार खून बहता है और कुछ मिनटों के बाद नहीं रुकता तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें

हाथों का सुन्न होना या हाथों में झुनझुनी होना

गर्भावस्था के दौरान, उंगलियों और हाथों में सूजन या झुनझुनी हो सकती है और यह सुन्न भी हो सकते हैं। इसे कार्पल ट्यूनल सिंड्रोम (carpal tunnel syndrome) कहा जाता है। यह लक्षण आपकी कलाई में मौजूद पतली नालियों के ऊतकों की सूजन के कारण होते हैं, और आमतौर पर यह बच्चे के पैदा होने के बाद गायब हो जाते हैं।

इस समस्या के लिए उपाय:

  • हाथों को आराम दिलाने के लिए थोड़ी थोड़ी देर बाद ब्रेक लें।
  • अपने डॉक्टर से कलाइयों को सीधा रखने के लिए कमठी (splint) बांधने के बारे में पूछें।

खिंचाव के निशान और त्वचा में परिवर्तन

आपकी त्वचा पर पड़ने वाली लाल, गुलाबी, या भूरे रंग की लकीरों को खिंचाव के निशान कहते हैं। आमतौर पर यह जांघों, नितंबों, पेट, और स्तनों पर दिखाई देते हैं। यह निशान त्वचा के खींचने के कारण होते हैं, और आमतौर पर गर्भावस्था के दूसरे चरण के दौरान दिखाई देते हैं।

कुछ महिलाएं गर्भावस्था के दौरान त्वचा में अन्य बदलावों को देखती हैं। कई महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान निप्पल (स्तन का अगला भाग) काले और भूरे रंग के हो जाते हैं। कई गर्भवती महिलाओं में त्वचा पर नाभि से लेकर नीचे गुप्तांग के बालों तक जाने वाली एक गहरे रंग की रेखा बन जाती है। गाल, माथे, नाक, या ऊपरी होंठ की त्वचा पर गहरे रंग के धब्बों का होना भी सामान्य है। यह धब्बे चेहरे के दोनों तरफ एक जैसे होते हैं। इन धब्बों को मेलेज़मा (melasma) या क्लोएज़मा (chloasma) कहा जाता है और यह सांवले या काले रंग की महिलाओं में ज़्यादा सामान्य होते हैं।

इसके लिए उपाय:

  • धैर्य रखें - खिंचाव के निशान और अन्य परिवर्तन आमतौर पर बच्चा होने के बाद हलके हो जाते हैं।

सूजन

कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान चेहरे, हाथों और टखनों में हल्की सूजन हो जाती है। जैसे-जैसे प्रसव का समय नज़दीक आता है वैसे-वैसे सूजन और ज़्यादा बढ़ जाती है।

सूजन से आराम पाने के उपाय:

  • रोजाना 8 से 10 गिलास तक तरल पदार्थ जैसे पानी, जूस आदि पीएं।
  • कैफीन न पीएं और नमकीन चीज़ें न खाएं।
  • अपने पैरों को आराम दें और ऊपर उठाएं।
  • अपने डॉक्टर से पैरों को सहारा देने वाले मोज़े के बारे में पूछें।

यदि आपके हाथ या पैर अचानक से सूज जाएं या आपका वजन तेज़ी से बढ़ने लगे, तो अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें — यह गर्भावस्था के दौरान होने वाले उच्च रक्तचाप (preeclampsia) का संकेत हो सकता है।

पेशाब का बार बार आना या पेशाब पर नियंत्रण न रहना

गर्भावस्था में पेशाब पर नियंत्रण न रहने की समस्याएं सामान्य हैं। आपका अजन्मा शिशु मूत्राशय, मूत्रमार्ग, और श्रोणि तल की मांसपेशियों को नीचे की ओर धकेलता है। इस दबाव के कारण आपको बार बार पेशाब आता है, और साथ ही साथ खांसते, हसते या छींकते समय आपका पेशाब पर नियंत्रण नहीं रहता।

इसके लिए उपाय:

  • बार बार पेशाब के लिए जाएँ।
  • पानी की कमी से बचने के लिए बहुत सारे तरल पदार्थ जैसे पानी, जूस आदि पीएं।
  • श्रोणि की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए किगल व्यायाम करें।

यदि आपको पेशाब करते समय जलन भी महसूस हो तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें — यह कोई संक्रमण हो सकता है।

अपस्फीत नसें (Varicose veins)

गर्भावस्था के दौरान, रक्त की मात्रा काफी बढ़ जाती है। इसके कारण नसें बड़ी हो जाती हैं। साथ ही, बच्चेदानी के पीछे की बड़ी नसों पर पड़ने वाला दबाव खून को हृदय तक वापिस पहुंचने में धीमा कर देता है। इन कारणों से, गर्भावस्था के दौरान पैरों और गुदा की नसों का सूजना (बवासीर) ज़्यादा सामान्य है।

अपस्फीत नसें त्वचा की सतह के ऊपर उभरी और सूजी हुई नसों जैसी दिखती हैं। यह मुड़ी या उभरी हुई और गहरे बैंगनी या नीले रंग की हो सकती हैं। यह ज़्यादातर टाँग के पिछले हिस्से या टाँग के अंदर पाई जाती हैं।

इसके लिए उपाय:

  • टांगों को ढकने वाले तंग कपड़े जैसे मौजा, जुराब आदि न पहनें।
  • अपनी टांगों और पैरों को ऊपर उठाकर बैठें।

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