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मधुमेह की जाँच और निदान

स्वास्थ्य    Diabetes    मधुमेह की जाँच और निदान

आपका डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ रक्त की जांच के माध्यम से मधुमेह, पूर्व मधुमेह और गर्भावस्था के दौरान होने वाले मधुमेह का निदान कर सकता है। रक्त की जाँच से पता चलता है कि क्या आपके रक्त में ग्लूकोज़ या शक्कर की मात्रा अधिक है।

अगर आपको लगता है कि आपको मधुमेह हो सकता है तो खुद से निदान करने की कोशिश न करें। जाँच करने वाले उपकरण जो आप डॉक्टर के परामर्श के बिना खरीद सकते हैं, जैसे रक्त ग्लूकोज़ मीटर, मधुमेह का निदान नहीं कर सकते।

मधुमेह के लिए किसे जांच करवानी चाहिए?

कोई भी व्यक्ति जिसे मधुमेह के लक्षण हैं उसे मधुमेह की जांच करवानी चाहिए। कुछ लोगों को कोई लक्षण नहीं होते लेकिन उनमें मधुमेह करने वाले कई कारण हो सकते हैं और जाँच की जरुरत होती है। जाँच के माध्यम से डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ मरीज़ों में मधुमेह का जल्द पता लगा पाते हैं और उनके साथ मिलकर मधुमेह को नियंत्रित और उसकी रोकथाम कर सकते हैं।

जाँच से डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ को पूर्व मधुमेह का पता लगाने में भी मदद मिलती है। यदि आपका वजन अधिक है तो पर्याप्त वजन कम करने के लिए रहन-सहन में बदलाव करना टाइप 2 मधुमेह की रोकथाम में आपकी मदद कर सकता है।

टाइप 1 मधुमेह (type 1 diabetes)

अक्सर, मधुमेह के लक्षण वाले लोगों में टाइप 1 मधुमेह के लिए जांच की जाती है। डॉक्टर आमतौर पर बच्चों और युवा वयस्कों में टाइप 1 मधुमेह का निदान करते हैं।

टाइप 2 मधुमेह (type 2 diabetes)

विशेषज्ञ टाइप 2 मधुमेह के लिए नियमित जांच की सलाह देते हैं यदि आप

  • 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं
  • आपकी उम्र 19 और 44 के बीच है, आपका वजन अधिक है या आप मोटे हैं और आप में मधुमेह का खतरा पैदा करने वाले एक या अधिक कारक हैं
  • एक महिला हैं जिसे गर्भावस्था के दौरान टाइप 1 मधुमेह हुआ था

हालांकि टाइप 2 मधुमेह अक्सर वयस्कों में होता है, लेकिन यह बच्चों में भी हो सकता है। विशेषज्ञ 10 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों की जाँच करवाने की सलाह देते हैं जिनका वजन अधिक है या जो मोटे हैं और जिनमें मधुमेह होने के कम से कम दो अन्य कारण हैं।

  • जन्म के समय बच्चे का कम वजन होना
  • बच्चे के गर्भ में होने के दौरान उसकी माँ को मधुमेह होना
  • मधुमेह का खतरा पैदा करने वाले कोई भी कारक होना

गर्भावस्था के दौरान होने वाला मधुमेह

सभी गर्भवती महिलाएं, जिनका पहले मधुमेह का निदान नहीं हुआ होता, उन्हें गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की जाँच करवानी चाहिए। यदि आप गर्भवती हैं, तो आप गर्भावस्था के 24वें से 28वें सप्ताह के बीच ग्लूकोज़ चैलेंज परीक्षण (glucose challenge test) करवाएं।

मधुमेह और पूर्व मधुमेह का निदान करने के लिए कौन सी जांच की जाती है?

डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ अक्सर मधुमेह का निदान करने के लिए फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज़ जाँच (Fasting Plasma Glucose Test) या ए1सी जाँच करते हैं। कुछ मामलों में वे रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज़ जाँच (Random Plasma Glucose Test) का भी उपयोग कर सकते हैं।

फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज़ जांच (Fasting Plasma Glucose Test)

फास्टिंग का अर्थ है कि आप कम से कम आठ से नौ घंटे तक खाली पेट रहें। फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज़ जाँच (Fasting Plasma Glucose Test) उसी समय पर आपके रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को मापता है। भरोसेमंद परिणामों के लिए, सुबह के समय कम से कम 8 घंटे तक बिना कुछ खाए यह जाँच करवाना सबसे अच्छा होता है। फास्टिंग के दौरान आप पानी की कुछ घूंट के अलावा कोई भी अन्य चीज़ खा-पी नहीं सकते।

ए1सी जांच

यह रक्त की एक जांच है जिससे आपको अपने रक्त में ग्लूकोज़ के पिछले 3 महीनों के सामान्य स्तरों का पता चलता है। ए1सी जाँच के लिए अन्य नाम हीमोग्लोबिन ए1सी, एच-बी ए1सी, ग्लाइकेटेड हेमोग्लोबिन और ग्लाइकोसिलेटेड हेमोग्लोबिन जाँच हैं। इस जाँच से पहले आप खा और पी सकते हैं। जब मधुमेह का निदान करने के लिए ए1सी जाँच का उपयोग करने की बात आती है, तो आपका डॉक्टर अनेक कारकों को ध्यान में रखेगा जैसे आपकी उम्र या आपको खून की कमी या रक्त की कोई अन्य समस्या है या नहीं।। ए1सी जाँच उन लोगों के लिए सही नहीं होती जिनमें खून की कमी होती है।

आपका डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपके ए1सी जाँच के परिणामों को प्रतिशत के रूप में प्रस्तुत करेगा, जैसे 7 प्रतिशत का ए1सी। प्रतिशत जितना अधिक होगा, आपके रक्त में ग्लूकोज़ का औसत स्तर उतना ही अधिक होगा।

जिन लोगों को मधुमेह होता है वह भी ए1सी जाँच से प्राप्त जानकारी का उपयोग अपने मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए कर सकते हैं।

रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज़ जाँच (Random Plasma Glucose Test)

कभी-कभी डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ मधुमेह के लक्षण मौजूद होने पर मधुमेह का निदान करने के लिए रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज़ जाँच का उपयोग करते हैं और वो आपके खाली पेट रहने तक का इंतजार नहीं करते। आपको रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज़ जाँच (Random Plasma Glucose Test) के लिए पूरी रात भूखा रहने के जरुरत नहीं होती। आप यह जाँच किसी भी समय करवा सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान होने वाले मधुमेह का निदान करने के लिए कौन सी जाँच की जाती है?

गर्भवती महिलाओं में ग्लूकोज़ चैलेंज जाँच (Glucose Challenge Test), ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस जाँच (Oral Glucose Tolerance Test) या दोनों की जा सकती हैं। इस जाँच से यह पता चलता है कि आपका शरीर ग्लूकोज़ को कितनी अच्छी तरह से सहन कर पाता है।

ग्लूकोज़ चैलेंज जाँच (Glucose Challenge Test)

यदि आप गर्भवती हैं और आपका डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान होने वाले मधुमेह के लिए आपकी जाँच कर रहा है, तो आपकी पहले ग्लूकोज़ चैलेंज जाँच (Glucose Challenge Test) की जा सकती है। इस जाँच का दूसरा नाम ग्लूकोज़ स्क्रीनिंग जाँच (Glucose Screening Test) है। इस जाँच में, डॉक्टर आपके द्वारा ग्लूकोज़ युक्त मीठा पेय पीए जाने के 1 घंटे बाद आपका रक्त निकालेगा। आपको इस जाँच के लिए खाली पेट रहने की जरूरत नहीं है। यदि आपके रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा बहुत अधिक (135 से 140 या उससे अधिक) है, तो आपको खाली पेट रहने के बाद ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस जाँच (Oral Glucose Tolerance Test) करवाने के लिए दोबारा आना पड़ सकता है।

ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस जाँच (Oral Glucose Tolerance Test)

ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस जाँच (Oral Glucose Tolerance Test) से कम से कम 8 घंटे तक खाली पेट रहने के बाद आपके रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को मापा जाता है। सबसे पहले, डॉक्टर आपके खून का नमूना लेगा। फिर आप ग्लूकोज़ युक्त पेय पीएंगे। गर्भावस्था के दौरान होने वाले मधुमेह का निदान करने के लिए, हर 2 से 3 घंटे में आपके रक्त का नमूना लिया जाएगा।

1 घंटे, 2 घंटे या 3 घंटे तक खाली पेट रहने के बाद होने वाली ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस जाँच (Oral Glucose Tolerance Test) के दौरान किसी भी दो या दो से अधिक जाँच में रक्त में ग्लूकोज़ के उच्च स्तर होने का मतलब है कि आपको ग़र्भकालीन मधुमेह (gestational diabetes) है। आपकी स्वास्थ्य देखभाल टीम यह बताएगी कि आपकी ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस जाँच के परिणामों का मतलब क्या है।

जो गर्भवती नहीं है उनमें भी डॉक्टर इस जांच का उपयोग करके टाइप 2 मधुमेह और पूर्व मधुमेह का निदान कर सकते हैं। फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज़ जाँच की तुलना में ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस जाँच द्वारा डॉक्टर टाइप 2 मधुमेह और पूर्व मधुमेह का बेहतर तरीके से पता लगा पाते हैं। हालांकि, ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस जाँच ज्यादा महंगी होती है और इसे करना आसान नहीं है। टाइप 2 मधुमेह और पूर्व मधुमेह का निदान करने के लिए, डॉक्टर को आपके द्वारा ग्लूकोज़ युक्त पेय पीने के 1 घंटे बाद और दोबारा 2 घंटे बाद आपके रक्त का नमूना लेने की ज़रूरत होगी।

जाँच के परिणामों की संख्या क्या संकेत देती है?

मधुमेह और पूर्व मधुमेह का पता लगाने के लिए प्रत्येक जाँच एक अलग माप का उपयोग करती है। आमतौर पर, मधुमेह का निदान करने के लिए दूसरे दिन फिर से उसी जाँच विधि को दोहराया जाना चाहिए। आपका डॉक्टर यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपको मधुमेह है या नहीं, किसी दूसरी जाँच विधि का उपयोग भी कर सकता है।

अगर आप गर्भवती नहीं हैं तो नीचे दी गई सूची आपको यह समझने में मदद करती है कि आपकी जाँच के परिणामों की संख्या का क्या अर्थ है।

निदान ए1सी (प्रतिशत) फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज़ जाँच ओरल ग्लूकोज़ टॉलरेंस जाँच रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज़ जाँच
सामान्य 5.7 से नीचे 99 या उससे नीचे 139 या उससे नीचे
पूर्व मधुमेह 5.7 से 6.4 100 से 125 140 से 199
मधुमेह 6.5 या उस से ऊपर 126 या उस से ऊपर 200 या उस से ऊपर 200 या उस से ऊपर

कौन सी जाँच आपके डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ को यह जानने में मदद करती है कि आपको किस प्रकार का मधुमेह है?

भले ही यहां दी गई जाँच यह पुष्टि कर सकती है कि आपको मधुमेह है, लेकिन यह ये नहीं बता सकती कि आपको किस टाइप का मधुमेह है। कभी-कभी डॉक्टर इस बारे में सुनिश्चित नहीं होते कि मधुमेह टाइप 1 है या टाइप 2 है। कई बार बच्चों में होने वाले एक असामान्य प्रकार के मधुमेह (मोनोजेनिक मधुमेह) को भी गलती से टाइप 1 मधुमेह समझ लिया जाता है। इसका उपचार मधुमेह के प्रकार पर निर्भर करता है, तो आपको किस प्रकार का मधुमेह है यह जानना बहुत जरुरी है।

क्या आपको टाइप 1 मधुमेह (type 1 diabetes) है, यह पता लगाने के लिए आपका डॉक्टर कुछ विशेष स्वप्रतिरक्षी (autoantibodies) का पता लगाता है। स्वप्रतिरक्षी वो प्रतिरक्षी (antibodies) होते हैं जो गलती से आपके स्वस्थ ऊतकों और कोशिकाओं पर हमला करते हैं। टाइप 1 मधुमेह में एक या उससे ज्यादा विशिष्ट प्रकार के स्वप्रतिरक्षीयों की मौजूदगी आम है, लेकिन टाइप 2 या मोनोजेनिक मधुमेह में ऐसा नहीं है। इस जाँच के लिए डॉक्टर को आपके रक्त का नमूना लेना होता है।

यदि आपको गर्भावस्था के दौरान मधुमेह था, तो यह देखने के लिए कि आपको टाइप 2 मधुमेह (type 2 diabetes) है या नहीं, आपको जन्म देने के बाद 12 सप्ताह के अंदर इसकी जाँच करवानी चाहिए।

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