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प्रसव के बाद फिर से स्वस्थ स्थिति में आना

स्वास्थ्य    गर्भावस्था    प्रसव के बाद फिर से स्वस्थ स्थिति में आना

महिलाएं प्रसव के बाद अपने शिशु की देखभाल में काफी व्यस्त हो जाती हैं, लेकिन प्रसव के बाद तथा स्तनपान के समय महिलाओं को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, जिससे उनमें ताकत तथा ऊर्जा का संचार हो सके और वह अपने शिशु की सही से देखभाल कर सकें।

आराम करना

प्रसव के बाद मानसिक व शारीरिक रूप से ठीक होने के लिए घर में कुछ दिन आराम करना चाहिए। इन दिनों में आपको अपनी ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना तथा अपने बच्चे के बारे में जानना चाहिए। हालाँकि इन दिनों आप बहुत उत्साहित होंगी तथा आप से व बच्चे से मिलने परिवार के सदस्य व दोस्त भी आएंगे, लेकिन जितना हो सके मेहमानों से कम मिलें व ज्यादा से ज्यादा आराम करें। सही समय पर भोजन करें, नींद लें तथा अपने बच्चे की सही से देखभाल करें। घरेलु कार्यों पर कम ध्यान दें तथा सफाई करने, भोजन बनाने, कपड़े धोने जैसे कार्यों के लिए अन्य लोगों की सहायता लेने में शर्म महसूस न करें।

शारीरिक बदलाव

प्रसव के बाद जैसे-जैसे आपका शरीर ठीक होने लगेगा, आपका डॉक्टर आपके शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में आपको बताएगा।

  • आपकी योनि से तरल पदार्थ निकलेगा जिसे लोचिआ (lochia) कहा जाता है। यह उत्तक व खून से मिलकर बना होता है जो गर्भावस्था में बच्चेदानी को सुरक्षा प्रदान करता है। शुरुआत में यह गाढ़ा तथा लाल रंग का होता है लेकिन समय के साथ-साथ व कुछ हफ़्तों के बाद यह कम व हल्के लाल रंग का हो जाता है।
  • आपके पैरों और टांगों में सूजन हो सकती है। पैरों को ऊपर उठा कर रखने से इस सूजन को कम किया जा सकता है।
  • आपको कब्ज हो सकती है जिसे आप ज्यादा से ज्यादा पानी पीकर तथा ताजे फल व सब्जियां खा कर दूर कर सकती हैं। *अगर आप अपने शिशु को स्तनपान नहीं करवाती तो आपके निप्पल्स (स्तन के आगे वाला भाग) से दूध रिसने लग सकता है और आपके स्तन भारी व तकलीफ दायक होने लगेंगे।
  • आगे आने वाले हफ़्तों में घूमने, सीढ़ियों पर चढ़ने जैसी गतिविधियों के लिए डॉक्टर द्वारा दी गयी सलाह का पालन करें।

प्रसव के लगभग छह हफ्तों के बाद डॉक्टर आपके स्वास्थ्य में होने वाले सुधारों की जाँच करेगा। इस समय आप अपनी फिटनेस और खान-पान की योजनाओं तथा दैनिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने के बारें में भी डॉक्टर से पूछें। इसके साथ-साथ आप यौन क्रिया तथा गर्भनिरोधक का उपयोग करने के बारें में भी पूछें। आपके मासिक धर्म का आना स्तनपान पर निर्भर करता है। अगर आप स्तनपान नहीं करवा रही हैं तो लगभग छह से आठ हफ़्तों के अंदर आपका मासिक धर्म शुरू हो जाएगा। अगर आप स्तनपान करवाती हैं तो मासिक धर्म को फिर से शुरू होने में कई महीने लग सकते हैं। फिर भी अगर आप एक और बच्चा नहीं चाहती तो गर्भनिरोधक का उपयोग करना गर्भवती होने से बचने का अच्छा तरीका है।

कुछ महिलाओं में बच्चे को जन्म देने के बाद के पहले साल में थाइरोइड जैसी समस्याएं होने लगती हैं। जिसे प्रसवोत्तर थाइरोडाइटस (postpartum thyroiditis) कहा जाता है। यह अक्सर अति सक्रिय थायराइड से शुरू होता है, जो दो से चार महीने तक रहता है। उसके बाद ज्यादातर महिलाओं में कम सक्रिय थाइरोइड के लक्षण आने लगतें हैं जो लगभग एक साल तक रहतें है। थायरॉइड की समस्या को अत्यधिक थकावट, नींद, कम ऊर्जा तथा वजन में बदलाव जैसे लक्षणों के कारण नजरअंदाज किया जाता है क्योंकि ये सब समस्याएं बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं में आम बात हैं। इस तरह के लक्षणों के आने पर व इनके लम्बे समय तक रहने पर आप डॉक्टर को बताएँ। कम सक्रिय थाइरोइड का इलाज करना बहुत ज़रूरी होता है और ज्यादातर मामलों में यह ठीक हो जाता है। लेकिन कुछ महिलाओं में इसके बाद कम सक्रिय थाइरोइड उत्पन्न हो जाता है, जिसे हाशिमोटो रोग (Hashimoto's disease) कहा जाता है और इसका इसका उपचार जीवन भर चलता है।

फिर से स्वस्थ वजन और आकार प्राप्त करना

गर्भावस्था तथा प्रसव दोनों एक महिला के शरीर को प्रभावित करते हैं। प्रसव के बाद आपका वजन लगभग 4-5 किलोग्राम कम हो जाता है तथा आपके शरीर में तरल पदार्थों के स्तर भी कम होने लगते हैं। इसलिए प्रसव के एकदम बाद और ज़्यादा वजन घटाने का प्रयास या उम्मीद न करें। कई महीनों में धीरे-धीरे वजन घटाना एक सुरक्षित तरीका है, खासकर जब आप स्तनपान करवा रहीं हो। स्तनपान करवाने वाली महिलाएं अपने दूध तथा बच्चे के विकास को प्रभावित किए बिना वजन घटा सकती हैं।

नियमित शारीरिक फिटनेस व उचित खान-पान आपको स्वस्थ वजन पर लौटने में सहायक हो सकते हैं। यदि आप वजन कम नहीं कर पा रही हैं तो शीतल पेय, मिठाइयां, तला हुआ भोजन, मांस व शराब जैसे अतिरिक्त शर्करा और चर्बी वाले पदार्थों का सेवन न करें। खासकर यह ध्यान रखें कि स्तनपान के महीनों में शराब का सेवन बिलकुल न करें। इन अतिरिक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करने तथा संतुलित आहार पर ध्यान केंद्रित करने से, आपके तथा आपके बच्चे को स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करने में सहायता होगी और आपके शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बना रहेगा। किसी भी भोजन या कसरत की योजना को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।

विषाद (डिप्रेशन)

प्रसव के बाद आप कुछ दिनों तक उदास, रोने वाला और व्याकुल महसूस कर सकते हैं। जन्म देने के बाद कई महिलाओं का मूड बदलता रहता है। बदलते हुए हार्मोन, बच्चे की देखभाल करने की चिंता, और नींद की कमी सभी आपकी भावनाओं को प्रभावित करते हैं।

धैर्य बनाए रखें। ये भावनाएं सामान्य होती हैं और आमतौर पर जल्दी चली जाती हैं। लेकिन अगर विषाद दो हफ्तों से अधिक रहे, तो प्रतीक्षा न करें और अपने डॉक्टर को दिखाएँ। आपको बच्चे के जन्म के बाद माँ में होने वाली निराशा (Postpartum depression) हो सकती है। इस समस्या का इलाज किया जा सकता है। यह जन्म के बाद पहले वर्ष के अंदर किसी भी समय हो सकता है।

इसके लक्षणों में शामिल हैं:

  • बेचैनी या चिड़चिड़ापन
  • उदासीनता, निराशा या बहुत रोना
  • ऊर्जा में कमी
  • सिरदर्द, सीने में दर्द, दिल का तेजी से और अनियमित रूप से धड़कना, सुन्न होना, या तेजी से साँस लेना
  • सो न पाना, बहुत थका हुआ महसूस होना, या दोनों
  • खाने और वजन घटाने में सक्षम न होना
  • ज्यादा खाना और वजन बढ़ना
  • ध्यान देने, याद रखने, या निर्णय लेने में परेशानी
  • बच्चे के बारे में अत्यधिक चिंतित होना
  • बच्चे में कोई दिलचस्पी न होना
  • निकम्मा और दोषी महसूस करना
  • यौन क्रिया और सामाजिक गतिविधियों में कोई दिलचस्पी न होना
  • अपने बच्चे या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आना

कुछ महिलाएं किसी को भी अपने लक्षणों के बारे में नहीं बताती हैं क्योंकि वे इन भावनाओं के होने से शर्मिंदा या दोषी महसूस करती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें इस समय में खुश होना चाहिए। ऐसा न होने दें! इसके कारण आपके बच्चे की देखभाल करना मुश्किल हो सकता है। जिन महिलाओं को प्रसव के बाद विषाद (डिप्रेशन) होता है उनके नवजात शिशु को बोलना सीखने में देरी हो सकती है। उन्हें भावनात्मक बंधन बनाने में भी समस्या हो सकती है। आपका डॉक्टर आपको बेहतर महसूस करने में मदद कर सकता है और आप अपने नए बच्चे का पूरा आनंद ले पाएंगे। चिकित्सा या उपचार से इसका इलाज किया जा सकता है।

हाल ही में हुए शोध से पता चलता है कि कई नए बने पिता गर्भावस्था के दौरान या उसके बाद विषाद (डिप्रेशन) का अनुभव कर सकते हैं। हालाँकि अधिक शोध करने की आवश्यकता है, विषाद (डिप्रेशन) होने से एक अच्छा पिता बनना मुश्किल हो सकता है और यह बच्चे के विकास को भी प्रभावित कर सकता है। नए बने पिता को भावनात्मक समस्याओं या विषाद के लक्षणों के लिए डॉक्टर से बात करनी चाहिए। विषाद का इलाज किया जा सकता है।

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